अरंडी तेल के फायदे, नुकसान और सही तरीका....

अरंडी का तेल आयुर्वेद की उन विरल देनों में से है जो केवल बाहरी देखभाल तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि शरीर के भीतर तक जाकर संतुलन स्थापित करती हैं। ग्रंथों में वर्णित एरंड तैल वातशामक, स्निग्ध और गहन पोषण देने वाला माना गया है—यही कारण है कि इसका उपयोग त्वचा, बाल, जोड़ और पाचन सभी स्तरों पर किया जाता रहा है।



त्वचा पर अरंडी तेल केवल नमी नहीं देता, बल्कि कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में सहायक होता है। बालों में यह जड़ों को मज़बूती देता है, रूखापन कम करता है और प्राकृतिक वृद्धि को समर्थन देता है। जोड़ों और मांसपेशियों में इसकी ऊष्ण तासीर जकड़न को खोलती है और थकान को शांत करती है। नाभि पर उपयोग करने से पाचन मार्ग में स्निग्धता आती है, जिससे गैस और भारीपन में राहत मिलती है।


आयुर्वेद में कब्ज़ को केवल पाचन की समस्या नहीं, बल्कि शरीर में शुष्कता का संकेत माना गया है। इसी कारण पारंपरिक रूप से रात में गुनगुने पानी में एक चम्मच अरंडी तेल लेने की विधि बताई गई है, जो आँतों की dryness को कम कर सहज शौच में सहायता करती है। यह प्रयोग वयस्कों के लिए है और विवेक के साथ किया जाना चाहिए।


अरंडी तेल का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है जब वह शुद्ध, cold pressed हो और सही विधि से नियमित रूप से उपयोग किया जाए। यह कोई त्वरित समाधान नहीं, बल्कि शरीर को उसकी प्राकृतिक अवस्था में लौटाने की एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है।


अरंडी का तेल (Castor oil) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसका उपयोग बवासीर से छुटकारा पाने के लिए किया जा सकता है। अरंडी के तेल को बवासीर वाले क्षेत्र में लगाने से दर्द दूर होता है। बवासीर में इस तेल के कई फायदे होते हैं जिनके बारे में हम जानेंगे। इसके अलावा यह भी जानेंगे  कि इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।


पाइल्स से छुटकारा पाने के लिए अरंडी का तेल क्यों उपयोग करें?

अरंडी के तेल का उत्पादन अरंडी के बीज से किया जाता है। यह तेल त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। रसोई के अलावा दवा बनाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। अरंडी के तेल से कई प्रकार की कॉस्मेटिक क्रीमें बनाई  जाती हैं।


बवासीर में इस तेल का इस्तेमाल करने के बाद आपको आराम करने की जरुरत होती है। यह जख़्मी हो चुके ऊतकों (tissues) को पोषण प्रदान करता है और उन्हें दुरुस्त में मदद करता है।


अरंडी के तेल का उपयोग आप दो तरह से कर सकते हैं। इसे बवासीर से प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जा सकता है या इसका सेवन किया जा सकता है। अरंडी के तेल का सेवन करने से यह रेचक (laxative) की तरह कार्य करता है जो कब्ज़ से छुटकारा दिलाता है। यह बैक्टीरिया को मारने में सक्षम है साथ ही शरीर को डिटॉक्स भी कर सकता है। कैस्टर आयल का सही प्रकार से प्रयोग किया जाए तो यह बवासीर को आसानी से दूर कर सकता है।


बवासीर में अरंडी के तेल का उपयोग कैसे करें?

आप अरंडी के तेल का सेवन कर सकते हैं। यह स्टूल को मुलायम बनता है जिससे मल त्याग करते समय दर्द नहीं होता है। इसका सेवन करने से कब्ज़ की शिकायत दूर होती है। कितनी मात्रा में सेवन करना है यह पैकेट के पीछे लिखा होता है। आप डॉक्टर से भी इसके डोज के बारे में पूछ सकते हैं।

आप इसका उपयोग मरहम की तरह भी कर सकते हैं। बवासीर से प्रभावित क्षेत्र में इसे लगाएं। आप इसे टी ट्री आयल के साथ मिक्स करके भी लगा सकते हैं। बराबर मात्रा में अरंडी के तेल और ट्री टी आयल को मिक्स कर लें और रुई के माध्यम से लगाएं।

अरंडी के तेल का सेवन या उपयोग करने से पहले एलर्जी का ध्यान दें। अगर कैस्टर आयल के साथ टी ट्री आयल मिक्स कर लिए हैं तो इसका सेवन न करें। इसे सिर्फ त्वचा में लगा सकते हैं।


अरंडी का तेल और टी ट्री आयल

टी ट्री आयल में रोगाणु रोधक (Antiseptic) गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा की खुजली और दर्द आसानी से दूर कर सकता है। जब टी ट्री आयल में अरंडी का तेल मिक्स हो जाता है तो इसके फायदे भी बढ़ जाते हैं। यह त्वचा के सूजन और दर्द को आसानी से खत्म कर देता है।

टी ट्री आयल के एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण ब्लीडिंग रोकने में भी सक्षम हैं। बाजार में टी ट्री आयल पतले रूप (diluted form) में भी आता है जिसे सीधे तौर पर त्वचा में लगाया जा सकता है। टी ट्री आयल को अरंडी के तेल के साथ मिक्स कर देने पर यह स्वयं डायल्यूट हो जाता है और इसके औषधीय गुण भी बढ़ जाते हैं।

दो चम्मच कैस्टर आयल में एक चम्मच टी ट्री आयल मिलाएं और रुई के माध्यम से पाइल्स में लगाएं।


बवासीर में अरंडी के तेल के क्या फायदे हैं?

पाइल्स में अरंडी के तेल का उपयोग करने से यह फायदे हो सकते हैं-

कैस्टर आयल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो संक्रमण को दूर करते हैं।

बवासीर के सूजन से छुटकारा दिलाता है।

एंटी-फंगल गुण भी पाए जाते हैं।

भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है जो त्वचा को टोन प्रदान करता है।

अरंडी के तेल के अन्य फायदे

बवासीर के अलावा भी कई रोग हैं, जिनमें अरंडी के तेल का उपयोग किया जा सकता है। अरंडी के तेल का उपयोग करने से ये फायदे हो सकते हैं-

यीस्ट इन्फेक्शन में लाभदायक

त्वरित चिकित्सा (Quick heal)

रेचक (Laxative) की तरह कार्य करता है।

जवान और खूबसूरत दिखने के लिए अरंडी के तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) के इलाज में

सेक्सुअल हेल्थ को बढ़ाने के लिए

बालों के ग्रोथ में लाभदायक

मुंहासे दूर करने में सक्षम

बवासीर में अरंडी के तेल के साइड इफ़ेक्ट- Side effects of castor oil in piles in Hindi

बवासीर के इलाज के लिए अरंडी के तेल के कई फायदे हैं लेकिन, इसके कई नुकसान भी झेलने पद सकते हैं। इसका सेवन करने से यह छोटी अंत में पहुँचकर रिनिकोलक एसिड में बदल सकता है जो आंत में दर्द उत्पन्न कर सकता है। और भी साइड इफ़ेक्ट हैं जो कैस्टर आयल के उपयोग से हो सकते हैं, जैसे-

डायरिया- कैस्टर आयल में राइसिन नामक एक जहरीला तत्वा पाया जाता है जिससे डायरिया हो सकती है। यह तत्व अरंडी के बीज में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।

पेट की ऐंठन- अरंडी का तेल रेचक की तरह कार्य करता है जिससे कब्ज़ की समस्या दूर होती है। लेकिन, अगर इसका अधिक मात्रा में सेवन कर लिया जाए तो पेट में ऐंठन भी हो सकती है।

त्वचा में चकत्ते पड़ना- त्वचा के लिए कैस्टर आयल फ़ायदेमंद होता है लेकिन, इसके प्रयोग से त्वचा में चकत्ते भी पद सकते हैं।

चक्कर आना- अरंडी के तेल का सेवन करने के बाद कुछ लोगों में चक्कर आने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा इसके सेवन से कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

बच्चों के लिए नुकसानदायक- 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अरंडी के तेल का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।

अरंडी के तेल के बवासीर में कई फायदे हो सकते हैं लेकिन, इसके कई नुकसान भी हैं। इसलिए इसका प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें।

Desi Alchemist में हम अरंडी तेल को एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक अनुशासन मानते हैं—जहाँ परंपरा, शुद्धता और परिणाम एक सूत्र में जुड़े होते हैं।


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